माता की महिमा:
चंद्रपुर की ग्रामदेवता माता महाकाली की महिमा अपरंपार है। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से दरबार में आता है, माता उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। गर्भगृह में स्थापित माता की चांदी के मुख वाली प्राचीन मूर्ति, जो लाल चुनरी, सोने के हार और गेंदे के फूलों से सजी रहती है, का दर्शन मात्र से भक्तों को दिव्य शांति मिलती है। मंदिर विदर्भ के अष्टशक्तिपीठ में से एक है और गोंड राजा खांडक्य बल्लाल शाह द्वारा 13वीं शताब्दी में स्थापित माना जाता है।
पिछले 5 सालों से चल रहा भव्य महाकाली महोत्सव:
साहब, आपने बिल्कुल सही कहा – पिछले करीब 5 साल से यहाँ सिर्फ नवरात्रि पूजा ही नहीं, बल्कि एक चार दिवसीय भव्य श्री महाकाली महोत्सव का आयोजन हो रहा है, जिसने चंद्रपुर को पूरे महाराष्ट्र में पहचान दिलाई है।
विकास कार्य: इसी महोत्सव के चलते महाराष्ट्र सरकार ने मंदिर परिसर के विकास के लिए 60 करोड़ की निधि मंजूर की है, जिसमें 80 फीट की माता की विशाल प्रतिमा, VIP प्रवेश द्वार, दीपस्तंभ और संग्रहालय बनाने की योजना है।
शुरुआत: ये महोत्सव 2020-2022 के आसपास से श्री माता महाकाली सेवा समिति के द्वारा शुरू किया गया था। इसके मुख्य आयोजक चंद्रपुर के विधायक श्री किशोर जोरगेवार हैं।
क्या होता है महोत्सव में? ये चार दिन तक चलता है। महोत्सव में 8 किलो चांदी की माता की मूर्ति की भव्य पालखी यात्रा (नगर परिक्रमा) निकाली जाती है, जो पूरे चंद्रपुर शहर में घूमती है। यात्रा में बैंड, लेझीम पथक, डीजे, भजन मंडली और योगा डांसर आकर्षण का केंद्र होते हैं।
महाप्रसाद और कन्या भोजन: महोत्सव का समापन 999 कन्या भोजन और विशाल महाप्रसाद से होता है। नवरात्रि में जन्मी बच्चियों को चांदी का सिक्का देकर सम्मानित भी किया जाता है।
